Principal's Message

प्राचार्या सन्देश शिक्षा का क्षेत्र बहुत विस्तृत है, या यू कहे की अथाह सागर है जिसमें मानव स्वयं कितना भी डूबना चाहे कम ही है क्योंकि शिक्षा के आयाम नवीन व पुरानी संस्कृति, शिक्षा अर्थात सार्वभौमिक आधार पर दी जानी चाहिए। आज हम शिक्षा के क्षेत्र में एक अमूल परिवर्तन चाहते है जो सम्पूर्ण देश के विकास में सहायक हो और विधार्थी व शिक्षक के बीच की कडी साबित हो सके, गुरू-शिष्य का उदाहरण बन सके।21 वीं शताब्दी जो हमारी शिक्षा के नवीनतम स्तर से सरोबार होगा व्यकित का विचार केवल छोटा नहीं अपितु विस्तृत क्षेत्र अर्थात सम्पूर्ण विश्व के कोने तक पहुचं पाएगा।
विविध सम्प्रेषणों से जुडने वाला माध्यम होगा जिस तरह कम्प्यूटर ने अपनी सर्वोच्च तकनीकी द्वारा कार्यो को बढ़ावा दिया शिक्षा के माध्यम से सभी विषयो में तकनीकी जान डालकर छात्र-छात्राओं को ज्ञानोपार्जन व रोजगार के साधन दिये है साथ ही शैक्षणिक-सहशैक्षणिक गतिविधियो में भी रूजान दिखाया है। निरन्तर श्रेष्ठ संकाय, अध्यापक तकनीक विकसित कर छात्र के उज्जवल भविष्य हेतु सहयोग प्रदान करे जो वास्तव में उनके चरित्र निर्माण, अनुशासन में गतिमान साबित होगा।
साथ ही हम नयी विधाओं को अपनाकर आगे बढेगे अपने देश को इस समय की खोेज से भी आगे और ऊपर नवीन खोज के द्वारा विश्व में विख्यात विधार्थी सर्वश्रेष्ठ मानव के रूप में नवीन पौधो का निर्माण स्वरूप ज्योतिमान कीर्ति स्थापित करेगे।
मैं यही सोचती हू और छात्रों से नवीन शिक्षापद्वति की ओर अग्रसर होने को कहती हूँ। वक्त की आवाज सुन मैं अपनी मंजिल की और निकल पड़ी शिक्षा के इस ज्ञान को कडी मेहनत और पक्के इरादे के बल पर कदम बढ़ाकर चल पड़ी ज्ञान के निर्मल जल में अंधकार को दूर भगाकर विधार्थियो को अनुशासन व मेहनत की राह दिखाकर उनके जीवन को सही राह दिखाना है सफर तो अभी बहुत बाकी है शिक्षा के स्तर को अभी और आगे बढ़ाना है। रास्तो के काँटो से हार नहीं मानुंगी विधार्थियो की उन्नति में अपना सहयोग हमेशा देती जाऊगीं।